Guru Grah Seva Dham

😊सुख – दुःख का कारण 🙇

सुख – दुःख का कारण 🙇
😊एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का स्वास्थ सही नहीं था तो पंडित जी ने अपने दो शिष्यो को सेठ के यहाँ भोजन के लिए भेज दिया.।


पर जब दोनों शिष्य वापस लौटे तो उनमे एक शिष्य 😔दु:खी और दूसरा 😊प्रसन्न था!

पंडित जी को देखकर आश्चर्य हुआ और पूछा बेटा क्यो दु:खी हो —
क्या सेठ नेभोजन मे अंतर कर दिया ?

“नहीं गुरु जी”

क्या सेठ ने सम्मान मे अंतर कर दिया ?

“नहीं गुरु जी”

क्या सेठ ने दक्षिणा मे अंतर कर दिया ?

“नहीं गुरु जी ,बराबर दक्षिणा दी 5 – 5 रुपये दोनों को “

अब तो गुरु जी को और भी आश्चर्य हुआ और पूछा फिर क्या कारण है ?
जो तुम दुःखी हो ?

तब दुखी चेला बोला गुरु जी मे तो सोचता था सेठ बहुत बड़ा आदमी है कम से कम 50 रुपये दक्षिणा देगा पर उसने 5 रुपये दिये इसलिए मे दु:खी😔 हूँ !!

अब दूसरे से पूछा तुम क्यो 😊प्रसन्न हो ?

तो दूसरा बोला गुरु जी मे जानता था सेठ बहुत कंजूस है 2 रुपए से ज्यादा दक्षिणा नहीं देगा पर उसने 5 रुपए दे दिये तो मे प्रसन्न 😊हू …!

👏बस यही हमारे मन का हाल है
संसार मे घटनाए समान रूप से घटती है
पर कोई उन घटनाओ से सुख प्राप्त करता है कोई दु:खी होता है ,
पर असल मे ना 😔दु:ख है ।
और ना 😊सुख ये हमारे मन की स्थिति पर निर्भर है ।
इसलिए मन से प्रसन्न रहिए तो आप हर परिस्थिति में प्रसन्न रहेंगे ।

संसार की यही रीति हैं
कामना पूरी ना हो तो दु:ख 😔
और कामना पूरी हो जाये तो सुख 😊
पर यदि कोई कामना ही न हो तो आनंद ।

😊आपको यह प्रसंग कैसा लगा कृपया अपने विचार हमे नीचे दिए गए बटन
( MESSAGE BUSINESS )
पर क्लिक कर के अवश्य बताए ।
👏आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं ॥

Leave a reply