Guru Grah Seva Dham

🍪कौनसा भोजन नहीं करना चाहिए🍪

🍪कौनसा भोजन नहीं करना चाहिए🍪
👳भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार के 🍛भोजन को ना करने के लिए बताया हैं ।

🍪पहला भोजन ….
जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो ,
वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है ।
अतः ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए ।

🍪दूसरा भोजन ….
जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया ,
वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होती है ।
अतः ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए ।

🍪तीसरे प्रकार का भोजन ….
जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो,
वह भोजन दरिद्रता के समान होता है ।
अतः ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए ।

🍪चौथे नंबर का भोजन ….
चलते हुए , खड़े – खड़े , पादुका ( जूता- चप्पल ) पहन कर , स्नान किए बिना, हाथ पैर धोए बिना, गिद्ध भोजन ( बफर या बफ़े ), अपवित्र स्थान पर, कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए ।
ऐसा करने से कई प्रकार के रोग होने के साथ साथ दरिद्रता एवं मानसिक तनाव प्राप्त होता हैं ।

🍪भोजन हमेशा शांत मन से, शुक आसन में बैठ कर , हो सकें तो एकांत एवं शांत स्थान पर करना चाहिए ।

👬अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है
चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है ….

🙏 संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है …

👏”सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए …
पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे ..

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