Guru Grah Seva Dham

🌞ध्यान का अर्थ क्या होता है ?

🌞ध्यान का अर्थ क्या होता है ?
😌ध्यान का एक अर्थ परवाह भी होता है ।
किसी व्यक्ति या वस्तु की परवाह करना ध्यान है ।
आप जीवन में किसी भी क्रिया को करते हो तो किसी न किसी व्यक्ति या वस्तु की परवाह ही तो करते हो ।
👪किसी को परिवार की परवाह है ,
🏤किसी को घर की परवाह है ,
🏭किसी को व्यापार की परवाह है
⛳और किसी को धर्म की परवाह है ।
😌ये सब ध्यान में ही आता है ।
परवाह के इस क्रम में ध्यान की चरम सीमा एवं ध्यान की सार्थकता यही है कि क्या आपके हृदय में ठाकुरजी की परवाह शुरू हुई है ?
😊जिससे प्रेम होता है उसका सतत चिंतन होता है । और सतत् चिंतन करना ही ध्यान का स्वरूप है ।
हर क्रिया में उसका चिंतन ध्यान है । ठाकुरजी आपके घर तक आए , आपके मन्दिर तक आए आपके मन तक आए ।
पर क्या आपके चिंतन तक आए ?
✨जो मन में होता है चिंतन उसी की यात्रा करता रहता है । हमारे जीवन में कोई ऐसा क्रम न हो जाय कि श्रीठाकुरजी के प्रति अपराध हो जाय । इस बात की चिंता और हमारे जीवन का प्रत्येक कृत्य ऐसा हो कि हम गोविन्द को प्रसन्न कर सकें इस बात का चिंतन आपके हृदय में स्वतः ध्यान को प्रकट करेगा ।।
🙂यदि ऐसा हों गया तो फिर आपको आँख बन्द करके बैठने की आवश्यकता नही पड़ेगी ।
फिर आप जों करोगे जैसे करोगे वही ध्यान हों जाएगा ।
गोपियों ने ध्यान की इसी क्रिया को तो अपनाया था ।
जिसके फलस्वरूप त्रिलोकी नाथ को भी गोपियों के इशारों पर नाचना पढ़ा ।

✨शेष महेश गणेश दिनेश , सुरेशहू जाहि निरंतर गावे ।
जाहि अनादि अनंत अखंड , अछेद अभेद सुवेद बतावे ।।
नारद से शुक व्यास रटे , पवि हारे तऊ पुनि पार ना पावे ।
ताहि अहीर की छोहरिया ,छछिया भर छाछ पे नाच नचावे ।।✨
✨परम रसिक श्रध्देय श्री हितेन्द्र कृष्ण जी महाराज ( श्रीधाम वृन्दावन )
Call – 7089500951
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